Nirvaan Babbar

Rookie (04/03/1975 / Delhi)

Nirvaan Babbar Poems

1. बन काल तू ही काल का (BAN KAAL TU HI KAAL KA) 8/10/2013
2. निर्वान के दोहे (NIRVAAN KE DOHE) 8/10/2013
3. चल उस राह पर (CHAL US RAAH PAR) 8/15/2013
4. क्या - क्या करना पड़ता है (KYA - KYA KARNA PADTA HAI) 8/15/2013
5. हमको सब बतलाओ तुम (HUMKO SAB BATLAO TUM) 8/15/2013
6. प्रेम _____________ (PREM) 8/17/2013
7. ग़म - ऐ - ज़िन्दगी (GAM -E ZINDAGI) 8/18/2013
8. ज़िन्दगी अपनी (ZINDAGI APNI) 8/19/2013
9. जज़्बात कई (ZAZBAAT KAI) 8/26/2013
10. क्या - क्या बना डाला (KYA - KYA BANA DALA) 8/27/2013
11. अपने तो यहाँ मिलते ही नहीं (APNE TO YAHAN MILTE HI NAHI) 8/26/2013
12. ये रूह तक को भी डुबो गया (YE RUH TAK KO BHIGO GAYA) 8/27/2013
13. कल्पना के कोरे कागज़ पर (KALPANA KE KORE KAGAZ PAR) 8/27/2013
14. जागी है चेतना (JAAGI HAI CHETNA) 8/27/2013
15. सावरें के रंग रंगी, बाँवरी हुई जाए रे (SAWAREN KE RANG RANGI BAAWARI HUI JAAYE RE) 8/28/2013
16. मन (MAAN) 8/28/2013
17. ह्रदय कोलाहल करता है (HIRDAY KOLAHAL KARTA HAI) 8/28/2013
18. मेरा जीवन (MERA JEEWAN) 8/28/2013
19. हृदय की मरू भूमिं मैं (HIRDAY KI MARU BHUMI MAIN) 8/28/2013
20. तितलियाँ (TITLIYAN) 8/29/2013
21. ज्ञान से ज्ञान का दीप जलना है (GYAN SE GYAN KA DEEP JALANA HAI) 8/29/2013
22. मछली रानी (MACHALI RANI) 8/29/2013
23. अभी नव संसार बसाना बाकी है (ABHI NAV SANSAAR BASAANA BAAKI HAI) 8/30/2013
24. चल उस राह पर 8/30/2013
25. ऐसा किया क्यों करते हैं (AISA KIYA KYON KARTE HAIN) 8/30/2013
26. वसुधा पर छाई है घनघोर घटा (VASUDHA PAR CHHAI HAI GHANGHOR GHATA) 8/30/2013
27. राम नाम से जग सजा (RAM NAAM SE JAG SAJA) 8/31/2013
28. निर्वान के दोहे - 2 (NIRVAAN KE DOHE - 2) 8/31/2013
29. गहन उदासी...... ज्वाला जैसी (GEHEN UDAASI..... JWALA JAISI) 9/1/2013
30. मैंने जग ये सारा छोड़ा दिया (MAINE JAG YE SAARA CHODE DIYA) 9/1/2013
31. चलो बदल जाएँ हम भी, हमारा भी क्या है (CHALO BADAL JAAYE HUM BHI HUMARA BHI KYA HAI) 9/1/2013
32. अपने दिल की बात सुनले (Apne Dil Ki Baat Sunle) 9/2/2013
33. रावण राज यहाँ पर भाई (RAVAN RAJ YAHAN PAR BHAI) 9/2/2013
34. सांसों से साँसें........ मिल बैठीं (Sanso Se Saanse Mıl Baıthı) 9/1/2013
35. मैं दीवानी हुई, पी की रानी हुई (MAI DIWANI HUI PEE KI RANI HUI) 9/3/2013
36. कभी हिम्मत हारा नहीं करते (Kabhi Himmat Haara Nahi Karte) 9/3/2013
37. सवयं को अज्ञानी मानिए (Swayam Ko Agyani Maaniye) 8/30/2013
38. जीवन के पथ पर (Jeewan Ke Path Par) 8/30/2013
39. ऐ मेरी ज़िन्दगी तू हसीं है बड़ी (AE MERI ZINDAGI TU HASIN HAI BADI) 9/4/2013
40. तू इंसान ही रह, बस इंसान ही बन (TU INSAAN HI REH, BAS INSAAN HI BAN) 9/5/2013
Best Poem of Nirvaan Babbar

Life Is Beautiful

LIFE IS BEAUTIFUL, AS ALWAYS IT IS,
LIFE DOES MAKE A LOT OF SENSE,
WE GET SORROWS ALL THE WAY,
TROUBLES ARE THERE TO HALT OUR WAY,
WE GET PROBLEMS EVERY WHERE,
ALL ARE REASONS FOR US TO PRAY,
LIFE SHOW US WAYS TO SMILE ALL THE WAY,

NIRVAAN BABBAR

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मन (MAAN)

तन से प्रेम, करे हर कोई,
मन की सुध, कोई जाने ना,

अपना प्रेम है, कृष्ण कन्हाई,
तन को, कुछ भी, माने ना,

रम जा मन मैं, मन मैं शाम,
मन मैं ही बसते हैं श्री राम,

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