Nirvaan Babbar

Rookie (04/03/1975 / Delhi)

अभी नव संसार बसाना बाकी है (ABHI NAV SANSAAR BASAANA BAAKI HAI) - Poem by Nirvaan Babbar

दिन ढलता रहा है, धीरे - धीरे,
अभी काम बहुत से, बाकी हैं,
जीवन पथ पे, चलने वाले,
श्वास अभी भी बाकी हैं,

चलना तो तेरा काम है पंथी,
राह अभी भी बाकी है,
झाँक ज़रा तू अपने अन्दर,
जान अभी भी बाकी है,

जो होना है, वो होना ही है,
डर ना ऐ, मतवाले तू,
हर मुश्किल को बहा तू लेजा,
तुझ मैं चंचलता, अभी भी बाकी है,

कष्ट तेरा हर इसी किनारे,
उस छोर नया सवेरा है,
जीवन का हर पल है तेरा,
अभी हर पल जीना बाकी है,

अभी नव संसार बसाना बाकी है,
अभी नव संसार बसाना बाकी है

निर्वान बब्बर


Poet's Notes about The Poem

All my poems & writing works are registered under
INDIAN COPYRIGHT ACT,1957 ©

Comments about अभी नव संसार बसाना बाकी है (ABHI NAV SANSAAR BASAANA BAAKI HAI) by Nirvaan Babbar

  • Rookie - 17 Points Shraddha The Poetess (9/7/2013 4:53:00 AM)

    vryyy nice.............
    nice one sir...... (Report) Reply

    0 person liked.
    0 person did not like.
Read all 1 comments »



Read this poem in other languages

This poem has not been translated into any other language yet.

I would like to translate this poem »

word flags

What do you think this poem is about?



Poem Submitted: Friday, August 30, 2013

Poem Edited: Friday, August 30, 2013


[Hata Bildir]