ajay srivastava

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सीढी - Poem by ajay srivastava

नेता वादो की सीढी से
इतनी उपर चड जाते है
तो फिर आम नागरिक
भला केसे दिखाई दे 11

धनी विज्ञापन की सीढी से
और अधिक धनवान बन जाते है
तो फिर महगाई का अर्थ क्या जाने 11

चाटुकार व रिशवतखोर की सीढी
तो मेहनत का अस्तित्व ही मिटा देती है 11

खूबसूरती की सीढी का तो कहना ही
बिना किसी कोशिश के
हर चाहत सिर झुकाए खडी होती है 11

यह सीढी सही व गलत को नही देखती
नेतिकता इस सीढी से दूर भागती है 11


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Poem Submitted: Wednesday, August 14, 2013

Poem Edited: Wednesday, August 14, 2013


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