Kamal Meena


जुदा... - Poem by Kamal Meena

रोक ना पाया दिल को
इक पल नज़रें जो तुमसे मिला बैठा
बस उस पल में ही
मैं तुम्हे जिंदगी बना बैठा
इजाज़त ना मेरी हुई
ना इजाज़त तुम्हारी
ये तो बस एक कयामत थी
जो मुझ पर बरसी
तेरी खुमारी
मौका मिला तो
हाले ए दिल भी बयाँ कर गया
खता उसकी ना थी
लगता मेरे इश्क़ की थी
बिन बोले कुछ
वो अपनी हसीन आँखों को
मुझसे जुदा कर गया...

Topic(s) of this poem: love hurts


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Poem Submitted: Tuesday, September 17, 2013

Poem Edited: Friday, December 26, 2014


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