(27 November 1907 – 18 January 2003 / Allahabad, Uttar Pradesh / British India)

What do you think this poem is about?

किस कर में यह वीणा धर दूँ?

देवों ने था जिसे बनाया,
देवों ने था जिसे बजाया,
मानव के हाथों में कैसे इसको आज समर्पित कर दूँ?
किस कर में यह वीणा धर दूँ?

इसने स्वर्ग रिझाना सीखा,
स्वर्गिक तान सुनाना सीखा,
जगती को खुश करनेवाले स्वर से कैसे इसको भर दूँ?
किस कर में यह वीणा धर दूँ?

क्यों बाकी अभिलाषा मन में,
झंकृत हो यह फिर जीवन में?
क्यों न हृदय निर्मम हो कहता अंगारे अब धर इस पर दूँ?
किस कर में यह वीणा धर दूँ?

Submitted: Friday, April 06, 2012
Edited: Friday, April 06, 2012


Comments about this poem (किस कर में यह वीणा धर दूँ? by Harivansh Rai Bachchan )

Enter the verification code :

There is no comment submitted by members..
[Hata Bildir]