Harivansh Rai Bachchan

(27 November 1907 – 18 January 2003 / Allahabad, Uttar Pradesh / British India)

अँधेरे का दीपक Poem by Harivansh Rai Bachchan


है अँधेरी रात पर दीवा जलाना कब मना है?

कल्पना के हाथ से कमनीय जो मंदिर बना था ,
भावना के हाथ से जिसमें वितानों को तना था,
स्वप्न ने अपने करों से था जिसे रुचि से सँवारा,
स्वर्ग के दुष्प्राप्य रंगों से, रसों से जो सना था,
ढह गया वह तो जुटाकर ईंट, पत्थर कंकड़ों को
एक अपनी शांति की कुटिया बनाना कब मना है?
है अँधेरी रात पर दीवा जलाना कब मना है?

बादलों के अश्रु से धोया गया नभनील नीलम
का बनाया था गया मधुपात्र मनमोहक, मनोरम,
प्रथम उशा की किरण की लालिमासी लाल मदिरा
थी उसी में चमचमाती नव घनों में चंचला सम,
वह अगर टूटा मिलाकर हाथ की दोनो हथेली,
एक निर्मल स्रोत से तृष्णा बुझाना कब मना है?
है अँधेरी रात पर दीवा जलाना कब मना है?

क्या घड़ी थी एक भी चिंता नहीं थी पास आई,
कालिमा तो दूर, छाया भी पलक पर थी न छाई,
आँख से मस्ती झपकती, बातसे मस्ती टपकती,
थी हँसी ऐसी जिसे सुन बादलों ने शर्म खाई,
वह गई तो ले गई उल्लास के आधार माना,
पर अथिरता पर समय की मुसकुराना कब मना है?
है अँधेरी रात पर दीवा जलाना कब मना है?

हाय, वे उन्माद के झोंके कि जिसमें राग जागा,
वैभवों से फेर आँखें गान का वरदान माँगा,
एक अंतर से ध्वनित हो दूसरे में जो निरन्तर,
भर दिया अंबरअवनि को मत्तता के गीत गागा,
अन्त उनका हो गया तो मन बहलने के लिये ही,
ले अधूरी पंक्ति कोई गुनगुनाना कब मना है?
है अँधेरी रात पर दीवा जलाना कब मना है?

हाय वे साथी कि चुम्बक लौहसे जो पास आए,
पास क्या आए, हृदय के बीच ही गोया समाए,
दिन कटे ऐसे कि कोई तार वीणा के मिलाकर
एक मीठा और प्यारा ज़िन्दगी का गीत गाए,
वे गए तो सोचकर यह लौटने वाले नहीं वे,
खोज मन का मीत कोई लौ लगाना कब मना है?
है अँधेरी रात पर दीवा जलाना कब मना है?

क्या हवाएँ थीं कि उजड़ा प्यार का वह आशियाना,
कुछ न आया काम तेरा शोर करना, गुल मचाना,
नाश की उन शक्तियों के साथ चलता ज़ोर किसका,
किन्तु ऐ निर्माण के प्रतिनिधि, तुझे होगा बताना,
जो बसे हैं वे उजड़ते हैं प्रकृति के जड़ नियम से,
पर किसी उजड़े हुए को फिर बसाना कब मना है?
है अँधेरी रात पर दीवा जलाना कब मना है?

Submitted: Friday, April 6, 2012
Edited: Friday, April 6, 2012

Do you like this poem?
114 person liked.
175 person did not like.

Form:


Read this poem in other languages

This poem has not been translated into any other language yet.

I would like to translate this poem »

word flags

What do you think this poem is about?

Comments about this poem (अँधेरे का दीपक by Harivansh Rai Bachchan )

  • Silver Star - 3,189 Points Pintu Mahakul (12/21/2014 3:04:00 PM)

    Washed by the tear of clouds it is made the beautiful and sweet lovely land. On this land in the darkness light sparks and shines to show the path of life. Very wonderful presentation really. Nice presentation makes this special. (Report) Reply

  • Rookie Laxminarayan Hota (4/18/2014 3:34:00 AM)

    I am a fan of yours. You are the King of Poets.
    Actually Bachchan Rules...One in the world of Poems and thoughts one in Movies and Acting.

    Love you Both... (Report) Reply

  • Rookie Swati Sharma (7/13/2013 12:04:00 PM)

    really a great poet
    nd ofcource awsm poem (Report) Reply

  • Silver Star - 3,022 Points Wahab Abdul (7/8/2013 4:06:00 PM)

    very lovely poem... here it is like son like father (not like father like son) (Report) Reply

Read all 4 comments »

Famous Poems

  1. Phenomenal Woman
    Maya Angelou
  2. Still I Rise
    Maya Angelou
  3. The Road Not Taken
    Robert Frost
  4. If You Forget Me
    Pablo Neruda
  5. Dreams
    Langston Hughes
  6. Annabel Lee
    Edgar Allan Poe
  7. Caged Bird
    Maya Angelou
  8. If
    Rudyard Kipling
  9. Stopping by Woods on a Snowy Evening
    Robert Frost
  10. A Dream Within A Dream
    Edgar Allan Poe
Trending Poets
Trending Poems
  1. Still I Rise, Maya Angelou
  2. Dreams, Langston Hughes
  3. The Road Not Taken, Robert Frost
  4. Phenomenal Woman, Maya Angelou
  5. Fire and Ice, Robert Frost
  6. A Dream Within A Dream, Edgar Allan Poe
  7. If, Rudyard Kipling
  8. If You Forget Me, Pablo Neruda
  9. Boats Sail On The Rivers, Christina Georgina Rossetti
  10. Caged Bird, Maya Angelou
[Hata Bildir]