तुम्हें पता है,
नज़रों की शरारत
कोई खेल नहीं होती—
ये तो
...
मेरे दोस्तों,
दुश्मन को मारने के लिए
हथियार नहीं चाहिए—
कभी-कभी
...
मैं आज
किसी उत्सव का गीत नहीं लिखता—
मैं आज
स्मृतियों के सामने
...
आज रात
शब्दों ने
अपने कपड़े उतार दिए हैं—
और मैं
...
प्रिय—
तुम मेरी आत्मा की
सबसे कोमल पुकार हो,
जैसे रात के माथे पर
...
मेरे दोस्तों,
जब ज़िंदगी
तुम्हारे सामने
दीवार बनकर खड़ी हो जाए—
...
मेरे दोस्तों,
ये बात
लोहे की तरह सच है—
जो मन कहता है
...