Pushp Sirohi Poems

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1.
नज़रों की शरारत

तुम्हें पता है,
नज़रों की शरारत
कोई खेल नहीं होती—
ये तो
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2.
ज़हर की जड़ें

मेरे दोस्तों,
दुश्मन को मारने के लिए
हथियार नहीं चाहिए—
कभी-कभी
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3.
Let India Be India Again

🇮🇳

Let India be India again,
Not merely a map of rivers and plains,
...

मेरे दोस्तों,
जब ज़िंदगी
तुम्हारे सामने
दीवार बनकर खड़ी हो जाए—
...

मेरे दोस्तों,
ये बात
लोहे की तरह सच है—
जो मन कहता है
...

आओ…
और इस दुनिया की थकान
अपने कंधों से उतार दो—
जैसे कोई रात
...

7.
वक़्त की दहलीज़ पर

प्रिये—
अगर हमारे पास
अनंत समय होता,
तो मैं तुम्हें
...

8.
हमारे बीच की खामोशी

आज रात
शब्दों ने
अपने कपड़े उतार दिए हैं—
और मैं
...

9.
प्रेम-गीत

प्रिय—
तुम मेरी आत्मा की
सबसे कोमल पुकार हो,
जैसे रात के माथे पर
...

10.
मैं लिख सकता हूँ

आज रात
मैं लिख सकता हूँ—
सबसे उदास पंक्तियाँ।
...

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