Pushp Sirohi Poems

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1.
नज़रों की शरारत

तुम्हें पता है,
नज़रों की शरारत
कोई खेल नहीं होती—
ये तो
...

2.
ज़हर की जड़ें

मेरे दोस्तों,
दुश्मन को मारने के लिए
हथियार नहीं चाहिए—
कभी-कभी
...

3.
तुम अर्थ में हो

मैं आज
किसी उत्सव का गीत नहीं लिखता—
मैं आज
स्मृतियों के सामने
...

मैंने
तुम्हें
प्यार नहीं किया
मैंने
...

5.
हमारे बीच की खामोशी

आज रात
शब्दों ने
अपने कपड़े उतार दिए हैं—
और मैं
...

6.
प्रेम-गीत

प्रिय—
तुम मेरी आत्मा की
सबसे कोमल पुकार हो,
जैसे रात के माथे पर
...

7.
मैं लिख सकता हूँ

आज रात
मैं लिख सकता हूँ—
सबसे उदास पंक्तियाँ।
...

मेरे दोस्तों,
जब ज़िंदगी
तुम्हारे सामने
दीवार बनकर खड़ी हो जाए—
...

मेरे दोस्तों,
ये बात
लोहे की तरह सच है—
जो मन कहता है
...

10.
Inner Peace

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