Treasure Island

Maithili Sharan Gupt

(3 August 1886 – 12 December 1964 / Chirgaon, Uttar Pradesh / British India)

मुझे फूल मत मारो


मुझे फूल मत मारो,
मैं अबला बाला वियोगिनी, कुछ तो दया विचारो।
होकर मधु के मीत मदन, पटु, तुम कटु गरल न गारो,
मुझे विकलता, तुम्हें विफलता, ठहरो, श्रम परिहारो।
नही भोगनी यह मैं कोई, जो तुम जाल पसारो,
बल हो तो सिन्दूर-बिन्दु यह-यह हरनेत्र निहारो!
रूप-दर्प कंदर्प, तुम्हें तो मेरे पति पर वारो,
लो, यह मेरी चरण-धूलि उस रति के सिर पर धारो!

Submitted: Thursday, April 05, 2012
Edited: Thursday, April 05, 2012

Do you like this poem?
0 person liked.
2 person did not like.

What do you think this poem is about?



Read this poem in other languages

This poem has not been translated into any other language yet.

I would like to translate this poem »

word flags

What do you think this poem is about?

improve

Comments about this poem (मुझे फूल मत मारो by Maithili Sharan Gupt )

Enter the verification code :

There is no comment submitted by members..
[Hata Bildir]