Harivansh Rai Bachchan

(27 November 1907 – 18 January 2003 / Allahabad, Uttar Pradesh / British India)

जुगनू - Poem by Harivansh Rai Bachchan

अँधेरी रात में दीपक जलाए कौन बैठा है?

उठी ऐसी घटा नभ में
छिपे सब चांद औ' तारे,
उठा तूफान वह नभ में
गए बुझ दीप भी सारे,
मगर इस रात में भी लौ लगाए कौन बैठा है?
अँधेरी रात में दीपक जलाए कौन बैठा है?

गगन में गर्व से उठउठ,
गगन में गर्व से घिरघिर,
गरज कहती घटाएँ हैं,
नहीं होगा उजाला फिर,
मगर चिर ज्योति में निष्ठा जमाए कौन बैठा है?
अँधेरी रात में दीपक जलाए कौन बैठा है?

तिमिर के राज का ऐसा
कठिन आतंक छाया है,
उठा जो शीश सकते थे
उन्होनें सिर झुकाया है,
मगर विद्रोह की ज्वाला जलाए कौन बैठा है?
अँधेरी रात में दीपक जलाए कौन बैठा है?

प्रलय का सब समां बांधे
प्रलय की रात है छाई,
विनाशक शक्तियों की इस
तिमिर के बीच बन आई,
मगर निर्माण में आशा दृढ़ाए कौन बैठा है?
अँधेरी रात में दीपक जलाए कौन बैठा है?

प्रभंजन, मेघ दामिनी ने
न क्या तोड़ा, न क्या फोड़ा,
धरा के और नभ के बीच
कुछ साबित नहीं छोड़ा,
मगर विश्वास को अपने बचाए कौन बैठा है?
अँधेरी रात में दीपक जलाए कौन बैठा है?

प्रलय की रात में सोचे
प्रणय की बात क्या कोई,
मगर पड़ प्रेम बंधन में
समझ किसने नहीं खोई,
किसी के पथ में पलकें बिछाए कौन बैठा है?
अँधेरी रात में दीपक जलाए कौन बैठा है?


Comments about जुगनू by Harivansh Rai Bachchan

  • Uzefa Rashida M.a Uzefa Rashida M.a (2/13/2016 5:50:00 AM)


    its a poem that shows us to be hopeful in our life. the darkness symbolizes the struggles, disappointments and dejection and rejection that we come across in our lives but to stand up with hope and faith is the greatest power that everyone requires to achieve success in life. (Report) Reply

    2 person liked.
    0 person did not like.
  • Pintu Mahakul Pintu Mahakul (12/21/2014 2:58:00 PM)


    Although many feel that further light will not appear in sky or in the dark but still it appears and disappears. Who ever thinks about life during the darkness of danger and destruction. Only light realizes while it does spark in Jugnoo. Wonderful and beautiful poem by Bachchan saab ji. (Report) Reply

  • Rakesh Kumar (7/5/2013 10:53:00 PM)


    veri nice poem. main hameha hoto par rakhta hun (Report) Reply

  • Rakesh Kumar (7/5/2013 10:53:00 PM)


    veri nice poem. main hameha hoto par rakhta hun (Report) Reply

Read all 4 comments »



Read this poem in other languages

This poem has not been translated into any other language yet.

I would like to translate this poem »

word flags

What do you think this poem is about?



Poem Submitted: Friday, April 6, 2012

Poem Edited: Friday, April 6, 2012


[Report Error]