Atul Rajput

Rookie - 141 Points (10-09-1990 / Sahanpur)

Hasna Bhuul Baitha Hu - Poem by Atul Rajput

अकेला हो गया हूँ अब गुज़ारा हो नहीं पाता,
दबा लेता हूँ अरमानो को, पर मारा नहीं जाता,
समझ लेती जो मेरे प्यार की इन्तहा को तुम,
यकीं मानो के जाना कुछ भी तुम्हारा नहीं जाता।

किसी की अहमियत को लफ्ज़ो में समझाया नहीं जाता,
खोकर प्यार को एक बार फिर पाया नहीं जाता,
नहीं आया मुझे इश्क करना ये गलती है मेरी,
ये वो हुनर है अतुल जो सिखाया नहीं जाता, , ,

क्यों मेरे पास से ये तन्हाई का साया नहीं जाता,
कोई पूछे जो दर्द-ए-गम तो बताया नहीं जाता,
हुआ करता था कई महफ़िलो की शान जो अतुल,
वो हसना भूल बैठा है, हसाया भी नहीं जाता।।।।।।।।।।।।।

Topic(s) of this poem: love


Comments about Hasna Bhuul Baitha Hu by Atul Rajput

  • Rajnish Manga Rajnish Manga (12/15/2015 4:14:00 AM)

    वाह! ! यह लाजवाब कविता है, प्रिय मित्र. इसमें मिठास भी है और भावों की गहराई भी है. धन्यवाद.
    हुआ करता था कई महफ़िलो की शान जो अतुल,
    वो हसना भूल बैठा है, हसाया भी नहीं जाता। (Report) Reply

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Poem Submitted: Wednesday, September 4, 2013

Poem Edited: Monday, July 27, 2015


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