milap singh


Apni Manjil Ki Taraf - Poem by milap singh

अपनी मंजिल की तरफ रुख करें
साँस तो है अभी और कुश चलें

मिल जाएगी जरूर मक्सुदे मंजिल
इरादा कर के अगर तरफ बढें

सारी दुनिया में जो रोशन रहे
आओ दुनिया में काम ऐसा कुछ करे

प्यार में इतना तो लाजमी है मिलाप
दर्द सहते रहे हम और चुप रहें

आने वाला कल ही तो नई आस है
बीते कल का क्यों हम दुःख करें


Poet's Notes about The Poem

Apani manjil ko pane ke liye lagatar kosis karte rahna chahiye.

Comments about Apni Manjil Ki Taraf by milap singh

There is no comment submitted by members..



Read this poem in other languages

This poem has not been translated into any other language yet.

I would like to translate this poem »

word flags

What do you think this poem is about?



Poem Submitted: Tuesday, November 27, 2012

Poem Edited: Tuesday, November 27, 2012


[Hata Bildir]