Madhuraj Kumar

Rookie - 320 Points (Bagaha, Bihar)

माँ - Poem by Madhuraj Kumar

तुम ही तो हो माँ
वह ध्वनि जो मेरे जीवन के हर कोने में
साँसों की तरंगों को पहुँचाती है
मेरी मुश्किलें मुझसे पहले ही
कैसे महसूस करती हो माँ
मेरी इन नन्ही नादानियों से
इतना क्यों डरती हो माँ
तुम ही तो हो माँ
वह आत्मा जो मेरे जीवन में जीती है
और मुझमें ही बस जाती है
सृष्टि की उत्पति से लेकर अंत तक क्या है
मुझे नहीं पता
पर मुझमें तो बस तू है
तू ही है मेरी माँ

Topic(s) of this poem: love, mother and child


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Poem Submitted: Sunday, November 15, 2015



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