Madhuraj Kumar

Rookie - 199 Points (Bagaha, Bihar)

यादें - Poem by Madhuraj Kumar

- - - - - - - १- - - - - - -

वक़्त की शाख से
टूटकर वो लम्हे
गिरे हैं दिल की झोली में
यादें बनकर
बैठा हूँ इस शाम फिर
सहेजने को
बरसाए हैं नैनों ने
दिल के कोने से
जो मोती चुनकर..

- - - - - - - २- - - - - -

यादेँ तेरी
मेघों सी
बरसी हैँ,
छलकी हैँ
दिल के कोने से
पन्ना दिल का
भीगा भीगा
और मैँ खोया खोया..

Topic(s) of this poem: memories, nostalgia


Comments about यादें by Madhuraj Kumar

There is no comment submitted by members..



Read this poem in other languages

This poem has not been translated into any other language yet.

I would like to translate this poem »

word flags


Poem Submitted: Sunday, November 15, 2015



[Hata Bildir]