ajay srivastava

Rookie - 171 Points (28/08/1964 / new delhi)

साक्षात्कार - Poem by ajay srivastava

हाँ होता है
जो चाहाता है नही होता
जब सपने दूर आकाश की
ऊचाइओ से टकराकर
जमीन पर बिखरे नजर आते है 11

जब उदासी के बादलो मे
अपने आप को पाते है
हर कोशिश असफल हो
लोट आपके पास की तरह
खडी जेसे पूछ रही हो 11

आखिर क्या कमी रह गयी
और कमी नजर न आए
तब असहनीय कष्ट होता है
और सोचने पर विवश कर देता
तब होता है सत्यता से साक्षात्कार 11


Comments about साक्षात्कार by ajay srivastava

There is no comment submitted by members..



Read this poem in other languages

This poem has not been translated into any other language yet.

I would like to translate this poem »

word flags

What do you think this poem is about?



Poem Submitted: Monday, August 19, 2013

Poem Edited: Monday, August 19, 2013


[Hata Bildir]