Treasure Island

Kahil Mehar


चलता चल...


अरमां लिए आखों में
बस चलता चल...चलता चल
कुछ कर दिखाने का
सब जीत जाने का
ख्वाब तू बुनता चल...बुनता चल
मंज़िल पाएगा तू
है जो नियत पाक तेरी
रोक ना पाएगा तूफ़ान भी
जो ज़ोर हुआ
तेरी हाथों की लकीरों का
ले सीने में ज़ज़्बा
बस तू चलता चल...चलता चल
सिर झुका जो तेरा
दूर कहीं उदासी में
उस अंधेरे में तू पाएगा उसे
उसके दर पर सिर झुकाता
बस तू चलता चल...चलता चल

Submitted: Tuesday, September 17, 2013
Edited: Wednesday, September 18, 2013

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