Dr. Navin Kumar Upadhyay


बँदऊँ दुलहा ँरामचन्द्र, - Poem by Dr. Navin Kumar Upadhyay

।श्री सीता विवाह मँगलम्।।
बँदऊँ दुलहा ँरामचन्द्र,
सिया दुलहिन सुकुमार ।
श्रीमुख झालर राजहिं,
सखीं लेत बलिहार ।।
धन्य धन्य श्री अवधपुरी,
महिमा अपरँपार।
धन्य धन्य सरयू सरित,
बिनवऊँ बारँबार ।।
सुर मुनि ऋषि कर दँडवत,
ताकत श्रीभूमि ओर ।
अनुदिन धाम सनेह बढै,
चाहत करुण कृपा कोर ।।
महामँगल मिथिलापुरी,
सदा मँगल मोद बहार ।
योग ज्ञान भक्ति सँगम दुति,
प्रनवउँ हिय हर्ष अपार ।।
धन्य धन्य कमला सरित,
उगगत प्रेम प्रवाह ।
मैथिल रस सरसत सदा,
राखत अँक निमिकुल नाह ।।
कौशल्या कैकेयी सुमित्रा पद,
प्रनवऊँ बारँबार। ।
राम भरत लखन रिपुहन,
जिन पाल्यो अँक सुकुमार। ।।
जानकी माँडवी उर्मिला,
श्रुतकीरति परम सुख खानि। ।
जनक परिवार महँ मणि भयो,
प्रेममूर्ति रस सानि ।।
राम भरत लक्ष्मण रिपुहन,
परम पुरुषार्थ स्वरुप ।
सीता माँडवी उर्मिला,
श्रुतकीरति शक्ति अनूप।।
जय जय चारों दुलहिन
चारो दुलह चितचोर ।
मैथिल समाज हुलसाइये,
लखिये हे करुणा कोर।।

Topic(s) of this poem: religious holiday


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Poem Submitted: Monday, March 20, 2017



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