Dr. Navin Kumar Upadhyay


मेरी मुहब्बत का तू हमेशा से ही ले रहा इम्तहान - Poem by Dr. Navin Kumar Upadhyay

मेरी मुहब्बत का तू हमेशा से ही ले रहा इम्तहान है।
यह क्या कर रहा, मेरे यार, हाजिर तेरे लिए जान है।।
कर तू सब कुछ, लेकिन छोड़ना न कभी, मेरा दामन,
तू ही तो मेरा सब कुछ, मेरे दिलवर, मेरे साजन,
मैं हूँ गुनहगार और रहूँगा भी सदा हरदम,
पर तुझ पर भरोसा करने वाला, न कहीं बेइमान है।
माँगता हूँ मेरे खुदा, बस दे देना यही दुआ,
तू मुझको दिखाता रहे, हमेशा अपना जलवा,
मेरी खातिर तो इतना। जरुर कर देना होगा,
कि तुझ पर लगता नहीं, कहीं कोई इल्जाम है।
मेरी तकदीर पे तुझे तरस खाना होगा,
मेरी तकसीर को न सीने से लगाना होगा,
मेरी नादानी को न कभी, नजर करना होगा,
और समझ लेना होगा, 'नवीन' यह बस एक इँसान है।

Topic(s) of this poem: love


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Poem Submitted: Monday, March 20, 2017



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