Nirvaan Babbar

Rookie (04/03/1975 / Delhi)

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जज़्बात कई (ZAZBAAT KAI)

फिर इक दिन, बीत गया, सांझ की बेला, आई है,
थोड़ी ठंडक सी आई है, अब मौसम मैं, नभ पे, लालिमा सी छाई है,

धीरे - धीरे, अँधेरा अब, होने को है,
दिखाने को है आसमां अब, तारों की छवि,

रजनी के आने की, आहट अब राहों मैं है,
आसमां के पटल पर, चाँद का अक्स अब, दिखने को है,

[Hata Bildir]