milap singh

[mialp singh bharmouri]

Poems of milap singh

61. Ya Me Anpadh Hun 3/30/2013
62. Ye Jindgi 12/19/2012
63. Yeh Sanse Yuhi Chalti Nhi 1/1/2013
64. बादल की िकश्ती 11/15/2012

Sanyukat Vishal Bharat

कैसा वो दौर था
कैसी थी हवाएँ
जब अपने प्यारे भारत को
लग रहीं थी बद्दुआएँ

जब घ्रीणा की दुर्गंध
हर ओर से थी आती
जब बन गया था वैरी
अपना धर्म- समप्रदाय और जाित

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